भारत-वियतनाम सांस्कृतिक रिश्तों को नई उड़ान, नई दिल्ली में ‘प्रेम की सुरधारा’ फिल्म का भव्य प्रीमियर

नई दिल्ली-

 इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘प्रेम की सुरधारा’ का भव्य प्रीमियर नई दिल्ली स्थित होटल ली मेरिडियन में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम भारत और वियतनाम के बीच सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ। समारोह में राजनीति, संस्कृति, मीडिया और फिल्म जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय रहे। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में वेव्स ओटीटी के सीईओ गौरव द्विवेदी, विक्रम सिंह मल्लिक तथा वियतनाम फेडरेशन ऑफ यूनेस्को एसोसिएशन के उप महासचिव प्रो. डॉ. चू बाओ क्वे उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि कैलाश विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में कहा कि ‘प्रेम की सुरधारा’ केवल एक फिल्म नहीं बल्कि भारत और वियतनाम की साझा सांस्कृतिक विरासत, विश्वास और भविष्य की कहानी है। उन्होंने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा संस्कृति और समाज के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक नया मानदंड स्थापित करेगी।

समारोह की शुरुआत भारतीय और वियतनामी कलाकारों की रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसने दोनों देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की। इस अवसर पर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के मुख्य संपादक विश्वरूप राय चौधरी और प्रबंध संपादक नीरजा राय चौधरी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

स्वागत भाषण में नीरजा राय चौधरी ने कहा कि यह आयोजन भारत और वियतनाम की प्राचीन सभ्यताओं के बीच सदियों पुरानी मित्रता के पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंध विश्व शांति, सहयोग और मानवीय मूल्यों को नई दिशा देने का कार्य करेंगे।

वेव्स ओटीटी के सीईओ गौरव द्विवेदी ने फिल्म ‘प्रेम की सुरधारा’ की सराहना करते हुए कहा कि यह फिल्म प्रेम, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि वेव्स ओटीटी भारतीय संस्कृति के संरक्षण और उसके वैश्विक विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

वेव्स ओटीटी के विक्रम सिंह मल्लिक ने कहा कि डिजिटल मीडिया के इस दौर में ऐसी सांस्कृतिक फिल्मों का महत्व और बढ़ जाता है। उनके अनुसार, यह फिल्म भारत और वियतनाम के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को और अधिक मजबूत करेगी तथा दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे की परंपराओं को समझने का अवसर देगी।

प्रो. डॉ. चू बाओ क्वे ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और वियतनाम के बीच सातवीं शताब्दी की चाम सभ्यता से लेकर आज तक सांस्कृतिक संबंधों की एक मजबूत और निरंतर धारा प्रवाहित होती रही है। उन्होंने कहा कि संगीत, नृत्य, दर्शन और मानवीय मूल्य दोनों देशों को एक-दूसरे से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण सूत्र हैं।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ‘प्रेम की सुरधारा’ दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को साझा विरासत, मानवीय मूल्यों और प्रेम के संदेश से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।

यह प्रीमियर समारोह भारत-वियतनाम सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

 

रिपोर्टर

  • Dr. Rajesh Kumar
    Dr. Rajesh Kumar

    The Reporter specializes in covering a news beat, produces daily news for Aaple Rajya News

    Dr. Rajesh Kumar

संबंधित पोस्ट