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नियमित दवा का सेवन किया तो बुजुर्ग ने भी टीबी को दे दी मात
-कटोरिया प्रखंड के हवड़िडीय गांव में धीरेन मेहरा अब पूरी तरह से हैं स्वस्थ
-नौ महीने तक नियमित दवा का सेवन किया, इस करण समय से हो गए ठीक
बांका-
टीबी को लेकर स्वास्थ्य विभाग सजग है। 2025 तक जिले को टीबी से मुक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयास हो रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। टीबी के मरीज चिह्नित भी हो रहे और ठीक भी हो रहे हैं। जिले में बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक टीबी को मात दे रहे हैं। कटोरिया प्रखंड के हवड़िडीह गांव के रहने वाले धीरेन मेहरा 74 साल के हैं। एक साल पहले ये संक्रमित हो गए थे। इलाज कराने के लिए देवघर गए, लेकिन वहां से उन्हें नजदीकी सरकारी संस्थान में जाने के लिए कहा गया। इसके बाद वह जिला यक्ष्मा केंद्र आए, जहां पर इनकी मुलाकात डीपीएस गणेश झा से हुई। उन्होंने धीरेन मेहरा की सही तरीके से काउंसिलिंग की। जांच के बाद इलाज शुरू किया। लगातार नौ महीने तक दवा का सेवन करने के बाद अब वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
धीरेन मेहरा कहते हैं कि इस उम्र में टीबी जैसी बीमारी हो जाने के कारण मैं डर गया था। इसीलिए इलाज कराने के लिए देवघर गया। वहां से मुझे अपने जिले के सरकारी अस्पताल में जाने के लिए कहा गया। वहां के डॉक्टर ने बताया कि आपको टीबी हो गया है और इसका इलाज सरकारी अस्पताल में मुफ्त में हो जाएगा। इसके बाद सदर अस्पताल के जिला यक्ष्मा केंद्र गया, जहां पर मेरा इलाज हुआ। अब मैं पूरी तरह से ठीक हूं। मुझे कोई भी परेशानी नहीं हो रही है। इलाज के दौरान मेरा कोई पैसा नहीं लगा। साथ ही जब तक इलाज चला तब तक मुझे पौष्टिक भोजन के लिए पांच सौ रुपये प्रतिमाह की राशि भी मिली।
नियमित दवा का सेवन बहुत जरूरीः जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते हैं कि टीबी की बीमारी में नियमित दवा का सेवन करना बहुत ही जरूरी है। जो लोग दवा बीच में छोड़ देते हैं, उसके एमडीआर टीबी की चपेट में आने की आशंका रहती है। इसलिए टीबी की दवा बीच में नहीं छोड़नी चाहिए। धीरेन मेहरा जी ने दवा का लगातार सेवन किया। इसी का परिणाम है कि इस उम्र में भी उन्होंने टीबी को जल्द मात दे दी। ये दूसरे टीबी मरीजों के लिए एक तरह से सीख भी है कि दवा का नियमित तौर पर सेवन करते रहना चाहिए।
सरकारी अस्पताल में सारी सुविधाएं मुफ्तःजिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा कहते हैं कि टीबी मरीजों के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में सारी सुविधाएं मुफ्त में मिलती हैं। न जांच के लिए पैसे लगते हैं और न ही इलाज में। ऊपर से दवा भी मुफ्त में मिलती है। जब तक इलाज चलता है पांच सौ रुपये प्रतिमाह खान-पान के लिए भी मिलता है। इसके साथ-साथ ठीक होने तक टीबी मरीजों की लगातार निगरानी भी होती है। इसलिए यदि कोई टीबी की चपेट में आ जाएं तो सरकारी अस्पताल का ही दरवाजा खटखटाएं। यह आपके ही हित में है।

रिपोर्टर
The Reporter specializes in covering a news beat, produces daily news for Aaple Rajya News
Dr. Rajesh Kumar