सरकारी अस्पतालों में टीबी का मुफ्त इलाज होने से गरीबों को मिल रही राहत

-दवा से लेकर जांच व इलाज तक की मुफ्त में मिल रही है सुविधा

-टीबी के इलाज में आर्थिक समस्या का नहीं करना पड़ रहा सामना


बांका, 2 अक्टूबर


 जिले के सभी सरकारी अस्पताल में टीबी की जांच से लेकर इलाज तक की मुफ्त व्यवस्था है। दवा भी मुफ्त में मिलती और जब तक इलाज चलता , तब तक सरकार की तरफ से पांच सौ रुपये प्रतिमाह सहायता राशि भी मिलती है। ये सुविधाएं आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए बहुत ही सहायक सिद्ध हो रही हैं। जिले के गरीब से गरीब लोग टीबी का इलाज कराकर स्वस्थ हो रहे हैं। जिले के रजौन प्रखंड की रहने वाली रजनी देवी दो साल पहले टीबी से संक्रमित हो गई थीं। पति मजदूरी करते हैं। किसी तरह पैसे का इंतजाम कर भागलपुर के निजी क्लीनिक में गईं इलाज कराने के लिए, लेकिन ज्यादा दिनों तक वहां पर अपना इलाज करवा नहीं सकीं। आर्थिक समस्या आ गई सामने। इसके बाद भागलपुर के मायागंज अस्पताल गईं। वहां पर इनका इलाज शुरू किया गया और इलाज के लिए रजौन स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया। वहां पर  आठ महीने तक दवा चली और अब यह स्वस्थ हैं।

रजौन में इलाज कराकर हो गई स्वस्थः रजनी देवी कहती हैं कि निजी अस्पताल में बहुत खर्च हो रहा था। इसके बाद मैं मायागंज अस्पताल गई। वहां पर पैसा तो नहीं लगा, लेकिन मुझे बताया कि रजौन में भी टीबी का मुफ्त में इलाज होता है। वहां भी इलाज की पूरी व्यवस्था है और बिल्कुल मुफ्त। इसके बाद मैं रजौन आई। यहां पर मेरा इलाज हुआ और मैं ठीक हो गई। इलाज के दौरान न तो जांच का पैसा लिया और न ही इलाज का। दवा भी मुफ्त में मिली और पौष्टिक आहार के लिए पांच सौ रुपये प्रतिमाह तब तक मिला, जब तक मेरा इलाज चला। मैं सरकार को धन्यवाद देती हूं कि गरीब लोगों के लिए मुफ्त में इलाज की व्यवस्था कर रखी है। इसी का परिणाम है कि आज मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं।

ठीक होने तक टीबी की नहीं छोड़ें दवाः जिला ड्रग इंचार्ज राजदेव राय कहते हैं कि हाल के दिनों में इस तरह के काफी केस मिले हैं। मरीज पहले निजी अस्पताल जाते  और घूम-फिरकर वापस अपने नजदीकी  सरकारी अस्पताल में आकर इलाज करवाते हैं। इस तरह से पिछले दिनों कई मरीज ठीक हुए हैं। जिले में टीबी को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चल रहा है। इस दौरान टीबी के लक्षण, बचाव और इलाज की जानकारी दी जाती है। साथ ही यह भी बताया जाता  कि इसका इलाज बिल्कुल मुफ्त में होता है। इसलिए लोगों से मेरी अपील है कि अगर किसी में टीबी के लक्षण दिखाई दे तो वह अपने नजदीकी  सरकारी अस्पताल जाएं। वहां पर आपका पूरा इलाज होगा। साथ ही जब तक ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा नहीं छोड़ें। ऐसा करने से एमडीआर टीबी होने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे ठीक होने में समय लग जाता है।

रिपोर्टर

  • Dr. Rajesh Kumar
    Dr. Rajesh Kumar

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